श्री महाप्रभुजी का बड़ा मंदिर, कोटा ( राजस्थान ) आपका स्वागत करता है
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भेंट व मनोरथ विनीति फॉर्म

Manorath Viniti Form

यच्च दुःखं यशोदाया नन्दादीनां च गोकुले।
गोपिकानां तु यद्‌दुःखं स्यान्मम क्वचित्‌॥१॥